रविवार, 3 अगस्त 2014

टीवी की शिक्षा

वो दिन दूर नहीं जब Tata sky के नए टीवी एड
कुछ यूँ होंगे -
पहला-(सात आठ साल का बच्चा) "पता है
अमेरिका में आठवीं में पढने वाले एक बच्चे ने
अपने स्कूल में गन से अंधाधुंध फायरिंग करके
सात बच्चों की जान ले
ली..क्योंकि अमेरिका में गन
खरीदना इजी है..अगर तुम्हारे सामने ऐसा कुछ
हो तो जमीन पर लेट जाओ,और मरने
की एक्टिंग करो...और पता है ये मैंने कहाँ से
सीखा..?टीवी से..फिर भी मम्मा टीवी देखने से
मना करती है..!"
दूसरा-(उसी उम्र की एक बच्ची) "पता है
इन्टरनेट पर सबसे ज्यादा सर्च किये
जानेवाला वर्ड 'सेक्स' है, और इस वर्ड
को सबसे ज्यादा सर्च करने वाले इंडियन
सबकांटिनेंट में पाए जाते हैं..किसी अजनबी के
बहकाने में न आओ, सेफ रहो..! और पता है ये
मैंने कहाँ से सीखा.?टीवी से..! फिर
भी मम्मा मुझे टीवी नहीं देखने देती..!"
फिर अंत में उदघोषक की आवाज
आती है-"कितना कुछ सीख सकते हैं बच्चे
टीवी से..!? Tata
sky..इसको लगा डाला तो आने
वाली पीढ़ी झिंगालाला..!"

हिपहाप हिपहाप

अरे ओ बब्बन सुने नाहीँ देवत एक आवाज मे.
अरे नाही भैया हम तो हनी भाई
का गाना सुनत रहै.
अबे कौन हनी भाई कौन है ये ससुर का नाती.
अरे भैया जी बहुत हि फेमस गायक कलाकार है
पूरा देश दिवाना है इनका.
अबे पर गाते क्या है राग ठुमरी के "हमार
भौजाई के संग खेली होली" एल्बमवा के गाने.
अरे नाही भैया रे तो बहुत हि जबराकु रेपर है.
हठ ठर्कि सुबह सुबह क्या अनाप शनाप
गंदि बाते करते हो.
अरे भैया नाही ये उ टाईप के रेपर नाही.
तो कौन टाईप के रेपर है ?
भैया तनिक कान मे इयरफोन तो लगाये के सुनो.
&ऽ% @ऽ%%¤¿?ऽ*§%
अबे हटा रे इ बुडबड को का अनाप शनाप बके
है ये ससुरा कछु समझ नही पडत.
अरे भैया जी आप रहने दो आप से
ना हो पायेगा
अबे बब्बन तुमको क्या समझ पडत है इस
चिल्लाहट मे.
भैया जी इसे कहते है
!
हाप हिपहाफ भैया इसे कहते है हिपहाप हिपहाप

एडमिन की जंग

इनबॉक्स के गुप्त सूत्रों से ज्ञात हुआ हैं कि पेज
के दो एडमिन बड़के शुक्ला जी और छुटकू सुमित
जी के मध्य उग्र झड़प हुई हैं। इसमें
शुक्ला जी का सिर फूटा हैं तथा सुमित
जी का नाक टुटा हैं।
मामले की गहन छानबीन के पश्चात् ज्ञात हुआ
कि बड़के ने छुटकु की फेवरेट
महिला खिलाडी का आपतिजनक पोस्टर अपने
कमरे की दीवार पर चिपका दिया था, जिसे देख कर
छुटका आग बबूला हो गया और बड़के को एक
चमाट मार दी। बदले में बड़के ने भी छुटके के एक
मुक्का दे धरा। छुटका अपनी टूटी नाक लेकर अपने
कमरे में आके बैठ गया। इस पर बड़का उसके कमरे के
बाहर आया और ललकारा की अगर लड़ाई शुरू
की हैं तो पूरी करो अन्दर जाकर क्यों बैठ गया?
थोड़ी देर बाद छुटका अन्दर से एक लम्बा सा लट्ठ
लाया और बड़के के सिर पर दे मारा। फिर
दोनों गुथमगुथा हो गए और लुड़कते-लुडकते बाहर
बरामदे में आ गए। वहाँ भी छुटके ने एक चमाट दे
मारी। इस पर बड़का और बिफर पड़ा की घर के
अन्दर तो ठीक हैं बाहर तूने सबके सामने मुझे कैसे
मारा? और उन्होंने अपने कमरे का दरवाजा बंद कर
दिया कि आज के बाद तू इधर नहीं आएगा...
शाम को हुई बैठक मैं बड़के ने धमकी दे दी की अब
मैं घर छोड़ के जा रहा हूँ। (वैसे गुप्त सूत्रों से
ज्ञात हुआ हैं कि बड़के का बाहर किसी के साथ
अफेयर हैं इसलिए बार बार घर छोड़ने की बात करते
हैं।) पर छुटकू ने हाथ पकड़ लिया की भैया ऐसे न
जाओ। हमारी बूढी माँ का क्या होगा? घर के
अन्य किसी भी सदस्य ने अब तक कोई
प्रतिक्रिया नहीं दी हैं।
अर्धरात्रि तक यही समाचार प्राप्त हुए हैं, आगे के
समाचार प्राप्त होते ही छापे जाएँगे। तब तक के
लिए टाटा....

महाकाव्य का लघुविश्लेषण

सत्य मारा नहीं छला जाता हैं,
हाथी की आड़ में द्रोण मारा जाता हैं।
वो तो गुरु था, शिष्य से कैसे हारता भला,
पुत्र प्रेम में पिता गिरा जाता हैं।
व्यूह टूट भी जाता, अभिमन्यु न बचता,
पित्रो के भेष में जब अधर्म लड़ा जाता हैं।
वो युद्ध नहीं एक जुआ ही था,
पत्नी के केशो पर, जहाँ पुत्र वारा जाता हैं।
-Sumit K. Menaria

ज्ञानी बाबा

क्या आप अपने जीवन मे आने वाले प्रश्नो के
जवाब ना पाकर परेशान है ?
क्या आप जीवन
की अनबुझी पहेलीयो को सुलझाना चाहते है ?
क्या आपको लगता है की जीवन मे आपको सब
कुछ पता नही ?
क्या आप अपने अन्दर और बाहर का सम्पूर्ण
ज्ञान हासिल करना चाहते हैं?
क्या आप भी आइन्स्टाइन की समझदार
बनना चाहते है ?
तो आपके सभी प्रश्नो का ईलाज है बाबा के
पास. बाबा बडे चमत्कारी है,
सभी सवालो का चमत्कारी गति से जवाब देते
हैं। अथाह ज्ञान के भण्डार बाबा आपसे कोई
फीस नहीं लेंगे। ये आपका सोना दुगना करने के
बहाने जो हैं उसे लेकर उड़न छु नहीं होंगे।इन्हें
अपना चमत्कार दिखने के लिए किसी टोटके
आवश्यकता नहीं हैं और सबसे बड़ी बात
इनकी शरण में आने के बाद बहन-
बेटियों कीइज्जत भी सुरक्षित रहेगी।
तो आज ही आइये बाबा गूगलदास जी के
पास... हमारा पता हैं www.google.com
नोट- जालसाजो से सावधान हमारी अन्य कोई
ब्रांच नहीं हैं।

मित्रता की परिभाषाएं

मित्रता की परिभाषाएं कभी बदली नहीँ जा सकती मित्रता का अभिप्राय
हमेशा त्याग या समर्पण
नही होता इसका अभिप्राय होता है अपने
मित्र के मन के विचारो को जान
पाना बिना उसके कहे शायद आज हम इस
भागती दौडती जीवन शैली मे
दोस्ती कि गाथाये भूल गये पर
दोस्ती तो वो होति है जिसमे कभी लालच
नही होता और इसका सबसे बडा उदाहरण
हमारे सनातन धर्म मे दिया गया है
जहा सुदामा और प्रभु श्री कृष्णा ने बिना एक
दूसरे को बताये एक दूसरे के मन के भाव जाने
दुसरी तरफ कर्ण और धुर्योधन का उदाहरण
देखिये कर्ण जानता था की वो अधर्म के शिविर
मे है फिर भी सिर्फ एक बार मित्र कहे जाने के
खातिर उसने अपने बंधुओ के विरूध्द युध्द
किया अपने मित्रता धर्म के पालन के लिऐ अपने
के हाथो मारा गया फिर तो जब हमारे सनातन
वैदिक धर्म मे इतने उदाहरण है, तो पाश्चात्य
जगत से प्रेरणा लेकर एक दिन के लिऐ
मित्रता जैसे पवित्र रिश्ते को याद करना मात्र
सिर्फ एक अपवाद को जन्म देना हुआ ।

वीरो की धरा- राजस्थान

राजस्थान का ईतिहास तो वैसे भी वीरो से
भरा पडा है फिर अगर लिस्ट बनाने जाये
तो आप थक जायेगेँ पर नाम शायद खत्म
ना हो हर क्षैत्र हर पग पर एक वीर का कर्ज
है जिन्होने शायद उस समय तब तक लडाई
लडी जब तक सर धड पर था ।
कयी बार तो जब मै अपने ईतिहास से जुडे
लेखको की किताबे पढता हू तब शायद अजीब
सा अहसास होता है।
विचार होता है यह जानकर की वो जानते थे
की वो बिना छल जीत नही पायेगेँ और सामने
वाला छल बीना युध्द करने वाला नही है . फिर
भी लडते थे उस समय उनके मन मे
क्या भावना होगी ? शायद वीरता दिखाने
की या फिर प्रांसगिक रूप मे कहे तो जब
मरना है तो फिर डरना कैसा गुलामी क्यू
स्विकारे जब आजाद जिये तो आजाद मरेगेँ और
इसी तरह वो लडे हर एक सैनिक, सेनापती,
सांमत, राजा, राणा सब लडे तब तक जब तक
की शरीर मे एक एक खून का कतरा था।
अब शायद वो इतिहास है और वो योध्दा मात्र
किताबो मे बंद मारे गये सैनिक जिन्हे सिर्फ
संख्या बना दिया गया है। शायद इस देश
की जडो मे हि कमी रही है वरना अगर
किसी और देश का इतिहास
ऐसा होता तो वो उसे इतना सहेज कर रखते जैसे
उनके लिऐ वो सब कुछ हो और हम सिर्फ उसे
नष्ट करना जानते है ।