शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

August 29, 2014 at 06:36PM

फ़ोन से जुड़े कुछ तथ्य--- >>कुछ लोग जब रात को अचानक फोन का बैलेंस ख़त्म होजाता है इतना परेशान हो जाते हैं माने जैसे सुबह तक वो इन्सान जिंदा ही नहीं रहेगा जिससे बात करनी थी। >> कुछ लोग जब फ़ोन की बैटरी 1-2% हो तो चार्जर की तरफ ऐसे भागते है जैसे उससे केह रहे हो "तुझे कुछ नहीं होगा भाई ! आँखे बंद मत करना मैं हूँ न ! सब ठीक हो जायेगा। >>कुछ लोग अपने फोन में ऐसे पैटर्न लॉक लगाते हैं जैसे आई एस आई की सारी गुप्त फाइलें उनके फ़ोन में ही पड़ी हो। >>कुछ लोग जब आपसे बात कर रहे होते हैं तो बार बार अपने फ़ोन को जेब से निकालते हैं, लॉक खोलते हैं और वापस लॉक कर देते हैं...वास्तव में वे कुछ देखते नहीं हैं, बस ये जताते हैं कि वो जाना चाहते हैं। >>गलती से फ़ोन किसी दुसरे दोस्त के यहाँ छुट जाए तो ऐसा महसूस होता हैं जैसे अपनी भोली-भाली गर्लफ्रेंड को शक्ति कपूर के पास छोड़ आये हो। >> अगर कोई फ़ोन में टाइप कर रहा हो और आपके देखते ही फ़ोन लॉक कर ले तो समझ लीजिये कि . . . . . . . . बेचारा किसी पेज का एडमिन पोस्ट बना रहा हैं। ;-) :-) #संकलित #ईलयास

गुरुवार, 28 अगस्त 2014

आज के सीरियल

लड़के का अपनी पत्नी के साथ अफेयर हैं लेकिन
वो अपनी बीवी को इसके बारे में बता नहीं सकता,
मज़बूरी में लड़के को छुप छुपकर अपनी पत्नी के साथ
अफेयर करना पड़ता हैं, इससे दुखी होकर वाइफ घर
छोड़ कर अपने ससुराल चली जाती हैं और अपने
हस्बैंड के साथ ख़ुशी ख़ुशी रहने लगती हैं। इधर एक
दिन बीवी को लड़के के पत्नी के साथ अफेयर के
बारे में पता चल जाता हैं और वो घर छोड़ कर जाने
लगती हैं, लेकिन पत्नी उसे रोक लेती हैं......
यह 'बालिका वधु' सीरियल की कहानी हैं।
वो दुखियारा लड़का जग्या हैं
पत्नी उसकी वर्तमान पत्नी गंगा,
बीवी उसकी दूसरी बीवी गौरी और वाइफ
उसकी पहली वाइफ आनंदी हैं।
अब जब हमारे घर की महिलायें ये सब बड़े चाव से
देखती हैं, हम घर जाते हैं और बाजार से सब्जी लेकर न
जाए और मम्मी/वाइफ आप पर बरस पड़े तो सोच
लीजिये इसमें उनकी कितनी गलती हैं?

मंगलवार, 19 अगस्त 2014

पाप या पुण्य

पाप या पुण्य?

(सुमित मेनारिया)

वो मेले में पिंजरा लेकर खड़ा था, पंछियों से भरा पिंजरा। वो उन्हें बेच नहीं रहा था। आप उसे पैसे दीजिये और वो उन्हें मुक्त कर देगा।
"इन्हें उड़ाने से क्या होगा?" मैंने पूछा।
"पुण्य मिलेगा, साहब!"
"और तुम इन्हें वापस पकड़ लाओगे?"
"हाँ जी।" वो धीरे से बुदबुदाया।
"तो तुम्हे पाप नहीं लगेगा।"
"लगेगा लेकिन पापी पेट के लिए सब करना पड़ता हैं।"
मैंने अपनी बंदुक निकाली और उसे गोली मार दी।

सोमवार, 18 अगस्त 2014

कोचिंग

शहर में एक कोचिंग सेंटर हैं 'शाह कोचिंग क्लासेज' जहां साल भर आपके कोर्स की कोचिंग करवाई जाती हैं। यहाँ की सारी फैकल्टी नार्मल हैं लेकिन एक ख़ास बात हैं कि साल के अंत में एक विशेष गुरूजी आते हैं। किसी को ये नहीं पता हैं कि वो गुरूजी कौन हैं? उनकी बस एक ही क्लास होती हैं और वो भी अंतिम, लेकिन ये गारंटी हैं वो अंतिम क्लास ज्वाइन करने के बाद आप आराम से पास हो जाएंगे। आप पुरे साल उस कोचिंग सेंटर से कोचिंग करते हैं। उस नार्मल फैकल्टी से पढ़ते हैं और उस अंतिम क्लास के लिए पूरी मेहनत करते हैं। लेकिन जब आप अंतिम क्लास ज्वाइन करते हैं तो चौंक जाते हैं! ये क्या? ये विशेष गुरुजी तो आपके पड़ोस वाले 'भंडारी सर' हैं। इनका तो अपना खुद का कोचिंग सेंटर हैं। आप क्या करेंगे? शायद आप अपने सारे दोस्तों को इस बारे में बताएँगे और खुद अगले साल 'भंडारी कोचिंग क्लासेज' ज्वाइन कर लेंगे। लेकिन आप ऐसा नहीं करते हैं। आप अपने दोस्तों को भी इस बारे में नहीं बताते हैं और खुद भी अगले साल वापस वही कोचिंग सेंटर ज्वाइन कर लेते हैं। गुरूजी की विशेष क्लास के लिए.... ------------------------ चलिए अब इसी बात को दुसरे तरीके से समझते हैं। वास्तव में कोई नहीं जानता की वो विशेष गुरु कौन हैं? वो भंडारी सर हैं ये बात तो खूद भंडारी कोचिंग सेंटर के स्टूडेंट्स कहते हैं। शाह कोचिंग क्लासेज के स्टूडेंट्स खुद कभी ये नहीं बताते कि वो भंडारी सर हैं। वे तो ये भी नहीं बताते की वो विशेष गुरु कौन हैं? तो क्या इसका यह मतलब निकाल लिया जाए कि वो भंडारी सर ही हैं और अगर ऐसा हैं तो शाह कोचिंग क्लासेज के स्टूडेंट्स भंडारी क्लासेस से ही कोचिंग क्यों नहीं करते?? काबा में शिवलिंग हैं या नहीं कोई नहीं जानता। लेकिन अगर हैं, तो सारे मुस्लिम जो हज पर जाते हैं, वहां से लौटने के बाद हिन्दू धर्म क्यों नहीं अपना लेते??

शनिवार, 16 अगस्त 2014

श्री कृष्णा के बारे में भ्रम

इंडियन मायथोलोजी मे श्री कृष्णा का जो स्थान है। वो आपको बताता है। शक्ति और बुध्दि का प्रयोग कैसे किया जाये, अवतारो मे श्री राम एक आदर्श पुरूष ,बेटा, पति, भाई ,मित्र का उदाहरण है। पर श्री कृष्णा भी ठीक उसी तरह एक उदाहरण है एक अच्छे मित्र, सखा,भाई,पुत्र के. पर अंतर क्या है दोनो मे ? अंतर है जहा श्री राम आपको आदर्श बनना सिखाते है। वही श्री कृष्णा आपको समय के साथ परिर्वतन और कूटनीति बताते है। श्री कृष्णा को अधिकतर जनमानस गोपियो के साथ रास लीला रचाते या शरारत करते बच्चे के रूप मे जानता है । पर आप गौर कर के देखिऐ आप पायेँगे की वो एक बेहतरीन नीति निर्माणकर्ता और कूटनीति के पहले जानकार थे । अधर्म पर धर्म की विजय तो रामायण भी बताती है । पर कृष्ण लीला आपको बताती है की समय के साथ धर्म भी बदलता है ! और अधर्म भी बढता है तो आप को अपनी नीतिया बदलनी पडती है ! अगर सतयुगी प्रभु श्री राम त्रेतायुग मे उन्ही नीतियो के सहारे चलता तो क्या वो उन छलो को पहचान पाता ? क्या भीम जरासंध जैसे बलशाली को मार पाता? क्या लक्ष्यागृह से कोई बच पाता ? क्या अर्जुन कभी हिम्मत कर पाता अपनो के विरूद्ध युद्ध की ? दरसल कुछ नास्तिक सवाल खडा करते है अवतार पर पर वो भूल जाते है की चाहे वो अवतार ना थे चाहे वो भगवान ना थे चाहे सब कुछ काल्पनिक है पर फिर वो गलत के खिलाफ लडना तो सिखाते है । आप वैज्ञानिकता की बाते करते है । पर अगर कही गलत होता है तब आप चुपचाप सर झुका कर निकल लेते है । दरसल विषय आपकी नास्तिकता या आस्तिकता नहीँ. विषय है उन करोडो की उन भावनाओ को चोट पहुचाने का आप अंधविश्वास खत्म किजिऐ कोई दिक्कत नहीँ पर विश्वास पर प्रहार करने के आप अधिकारी नहीँ

गुरुवार, 14 अगस्त 2014

आजादी के मायने

आजादि बडा अजीब शब्द है! आजाद देश के वासी होने के बावजूद गुलामी तो हमारी नसो मे खून से ज्यादा भरी पडी है ! क्या मायने इस आजादी के ? आप आजाद है ! साल मे दो बार फेसबुक पर तिरगेँ का फोटो लगा लिया , फिर देशभक्ति कि एक आधी लाईने लिख दि. और आखिर मे जाकर दो चार फोटो शहीदो की लाईक करके आपने अपनी आजादि का सबूत दिया पर वास्तविकता मे आप मैँ हम सब आखिर रहे तो गुलाम. कभी भाषावाद के कभी धर्म के कभी जात के कभी दलगत राजनीति के कभी अपने लालच के और फिर भी अगर आजादी के सदुपयोग की बात की जाये तो हम अव्वल है । अरे भाई मनचाहा जहा पेशाब कर दिये,मनचाहा जहा थूक दिये इच्छा की सिगरेट पीने की तो ली एक जलाकर फूकने लगे अरे इतने आजाद है हम की कानून से डरना तो अलग कानून हमसे डरे. छात्रो को बस मे रियायत ना मिले तो बस मे आग लगा दि. कालेज मे नाकाबिल होने की वजह से एडमिशन ना मिले तो कालेज बंद आरक्षण ना मिले तो सडके बंद ट्रेन बंद मुद्दे पर सहमत ना हो तो संसद बंद अगर सब कुछ ठिक रहा तो दो चार बम धमाके होकर बता देँगेँ हमारी आजादि का मतलब हेलमेट ना पहनने की आजादी, गाडि मानक गति से तेज चलाने की आजादी लडकिया छेडने की आजादी लोगो को पिटने की आजादी दहेज मे गाडी ना मिले तो पत्नी को जलाने की आजादी. 5 साल से लेकर 20 साल तक की लडकी के साथ बलात्कार की आजादी ! अपने प्रेम को ठुकराने पर तेजाब फेकने की आजादी! अब भैया इतनी आजादि जिस देश मे हो उसके देशवासी अगर एक दिन आजादि दिवस पर खुशिया मना लिये तो मुझ जैसे गुलाम आदमी को बोलने का क्या हक अबे गधे थे जो मर गये 23, 24 साल की उम्र और बोल गये की इस आजादि की किमत समझना और मे साला इंटेलेक्चुएल फूल

काश हम गुलाम होते....

"काश! हम गुलाम होते...." कभी कभी मैं सोचता हूँ की हम आज़ाद क्यों हुए? काश हम गुलाम होते.... अधपके हिंगलिश ट्यूटर की जगह, असली अंग्रेज से अंग्रेजी सिखते.... लाठिया तो आज भी खाते हैं सच के लिए लड़ने पर, तब 'जय हिन्द' कह कर हंटर ही खाते.... पटरीयां-सड़के तो वो भी बीछा ही रहे थे, कम से कम पूरा एक रुपया तो पहुचाते... बिक चुका हैं हर चैनल हर अखबार, देशप्रेम की खातिर कुछ अखबार सच भी बताते... मस्ती से देते सारे पेपर अंग्रेजी में, अनुवादित हिंदी के झंझट से मुक्ति पाते... हिंदी के इस पेज की खातिर, गूगल इनपुट पर उँगलियाँ न गिसवाते... आज मेरे अपने ही बेच खा रहे हैं देश मेरा, गोरे-काले के भेद से ही, हम दुश्मन तो पहचान पाते.... वो मुर्ख थे जो लड़-मर गए, इस देश को आज़ाद कर गए... अंग्रेज बुरे रहे थे हम कौनसे अच्छे, दिल पर हाथ रखिये कौनसे सच्चे हैं, एक दिन का पर्व हैं, मना लीजिये, तिरंगे को प्रोफाइल पिक्चर बना लीजिये, सुबह कही घुमने चले जाइएगा, परिवार के संग पिकनिक मानियेगा, थोडी बहुत हो देशभक्ति तो टीवी चलाइए, उसपर कोई देशभक्ति की फिल्म लगाइए... कुछ बच्चो संग स्कूल जाइएगा, तालियाँ भिडिये, हौंसला बढ़ाइए, हो गया झंडा, मिल गयी छुट्टी, देशप्रेम की तस्सली झूठी... जाने किस खातिर वे फांसी पर झूल गए, वो देश आज़ाद कर गए पर ये भूल गए, केवल अंग्रेजो को भगाने से देश आबाद नहीं होता, देश नहीं बढता जब तक हर शख्स 'आज़ाद' नहीं होता.....